ऐतिहासिक जगहें
अबू बकर (रज़ि.) मस्जिद
मक्का
मस्जिद चौथी मंजिल पर होने के बावजूद, इस ऊँची इमारत में तरह-तरह के सामान खरीदने के लिए शॉपिंग मॉल और फास्ट फूड सहित विभिन्न प्रकार के भोजन की व्यवस्था है। हाजियों और नमाज़ियों के लिए दूसरी मंजिल पर उच्च-स्तरीय शौचालय हैं।
बांग्लादेश के नरसिंदी जिले के निवासी अल्ताफ हुसैन ने कहा, इस मस्जिद में नमाज़ पढ़कर बहुत अच्छा लग रहा है। यह सोचकर ही अच्छा लगता है कि एक समय इस इमारत में खलीफाओं और सहाबा के कदम पड़े थे।
बांग्लादेश से इस बार पवित्र हज अदा करने के लिए कुल 1 लाख 27 हजार 298 लोग (प्रबंधन सदस्यों सहित) सऊदी अरब गए हैं। हज अदा करने के दौरान वहाँ अब तक कुल 102 बांग्लादेशियों का इंतकाल हो चुका है। हज के बाद हाजियों की वापसी की हज उड़ानें गत 27 अगस्त से शुरू हुई हैं।
मक्का की और जगहें

जबलुन नूर और ग़ारे हिरा
मक्का के उत्तर-पूर्व में एक खड़े पहाड़ की चोटी के निकट छोटी-सी गुफा ग़ार-ए-हिरा है।
जबल-ए-सौर और ग़ार-ए-सौर
मक्का के दक्षिण में स्थित खड़े जबल-ए-सौर की ढलान पर छिपी हुई एक छोटी-सी गुफा। हिजरत के समय रसूलुल्लाह ﷺ और अबू बक्र (रज़ि.) ने यहाँ तीन रातें शरण ली थीं।
मिना - तंबुओं का शहर
मक्का और मुज़दलिफ़ा के बीच स्थित घाटी, जहाँ हज के दिनों में हाजी ठहरते हैं। जमरात, क़ुर्बानी और तशरीक़ की रातों का केंद्र यही स्थान है।
जमरात
मिना के भीतर स्थित तीन स्तंभ, जहाँ हाजी कंकड़ मारते हैं। यह हज का एक वाजिब अमल है, जो इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की स्मृति से जुड़ा है।
मस्जिदुल ख़ैफ़
मिना की सबसे बड़ी और प्राचीन मस्जिद, जमरतुस सुग़रा के पास स्थित है। विदाई हज में रसूलुल्लाह ﷺ ने यहाँ नमाज़ अदा की थी।
अरफ़ात और मस्जिद-ए-नमिरा
मक्का के पूर्व में स्थित विस्तृत मैदान, जहाँ 9 ज़िलहिज्जा को हाजी ठहरते हैं। यह वुक़ूफ़ ही हज का मूल रुक्न है। मैदान के पश्चिमी छोर पर मस्जिदे नमिरा स्थित है।