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हज गाइड

११–१३ ज़िलहज (अय्यामुत-तशरीक)

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अय्यामुत-तशरीक या तशरीक के दिनों में किए जाने वाले कार्य

1 मिनट में पढ़ेंआखिरी अपडेट 11 सितंबर 2026

ये दिन जैसे इबादत-बंदगी और ज़िक्र-अज़कार के दिन हैं, वैसे ही आनंद और प्रसन्नता के दिन भी हैं। जैसा कि पहले उल्लेख किया जा चुका है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, ‘अय्यामुत-तशरीक खाने-पीने और अल्लाह के ज़िक्र के दिन हैं।’ इन दिनों में अल्लाह रब्बुल आलमीन की दी हुई नेमतों से आनंदित होकर उसका शुक्र और ज़िक्र अदा करना चाहिए। ज़िक्र अदा करने की कुछ विधियाँ हदीस में उल्लिखित हैं:

(१) नमाज़ के बाद तकबीर पढ़ना और नमाज़ के अतिरिक्त भी हर समय तकबीर पढ़ना। इस तकबीर को पढ़कर हम यह प्रमाणित करते हैं कि ये दिन अल्लाह के ज़िक्र के दिन हैं। इस ज़िक्र का निर्देश जिस प्रकार हाजियों के लिए है, उसी प्रकार उनके लिए भी है जो हज नहीं कर रहे हैं।

(२) क़ुर्बानी और हज के पशु को ज़बह करते समय अल्लाह तआला का नाम लेना और तकबीर कहना।

(३) खाने-पीने के आरंभ और अंत में अल्लाह तआला का ज़िक्र करना। यद्यपि ऐसा सदैव करने का निर्देश है, फिर भी इन दिनों में इसे अधिक महत्त्व देना चाहिए। इसी प्रकार हज से संबंधित सभी कार्यों और सुबह-शाम के ज़िक्रों का ध्यान रखना।

(४) हज करते समय कंकड़ मारने के दौरान अल्लाह तआला की तकबीर पढ़ना।

(५) इनके अतिरिक्त भी किसी भी समय और किसी भी अवस्था में अल्लाह का ज़िक्र करना।