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ऐतिहासिक जगहें

मस्जिद-ए-नबवी

मदीना

मस्जिद-ए-नबवी, मदीना

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हिजरत के बाद मदीना पहुँचकर रसूलुल्लाह ﷺ ने स्वयं सहाबा के साथ काम करके इस मस्जिद का निर्माण किया। आरंभ में यह खजूर के तनों और पत्तों से बनी एक साधारण संरचना थी और इसका फ़र्श मिट्टी का था। मस्जिद केवल नमाज़ की जगह नहीं थी—यहीं से शिक्षा, न्याय और राज्य संचालन के कार्य किए जाते थे तथा इसके एक ओर असहाबे सुफ़्फ़ा रहते थे। रसूलुल्लाह ﷺ के इंतिकाल के बाद उन्हें आयशा (रज़ि.) के कक्ष में दफ़न किया गया, जो बाद के विस्तार में मस्जिद के भीतर शामिल हो गया; वहीं अबू बक्र और उमर (रज़ि.) की क़ब्रें भी हैं। हदीस में इस मस्जिद में नमाज़ अदा करने की विशेष फ़ज़ीलत वर्णित हुई है। ख़ुलफ़ाए राशिदीन के समय से लेकर वर्तमान सऊदी दौर तक इसका कई बार विस्तार हुआ है और अब इसमें लाखों नमाज़ियों के लिए स्थान है।

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