3 हैं, वे ये हैं:
(1) इहराम के कपड़े पहनकर उमरा की नीयत करने का कार्य मीक़ात पार करने से पहले ही करना।
(2) ‘सफ़ा और मरवा’ इन दोनों पहाड़ियों के बीच सई करना। कुछ आलिमों ने इसे रुक्न अर्थात फ़र्ज़ कहा है।
(3) बाल काटना (सिर के बाल मुंडवाना या छोटे करवाना)।