(१) इस तारीख़ को दिन के समय ही अल्लाह तआला पहले आसमान पर उतरते हैं।
(२) अल्लाह के निकट उस दिन से उत्तम कोई अन्य दिन नहीं है।
(३) अल्लाह अपने बन्दों के लिए अपनी दया का ख़ज़ाना खोल देते हैं।
(४) उस दिन अल्लाह बन्दों के अत्यन्त निकट हो जाते हैं।
(५) उस दिन अल्लाह अरफ़ात में ठहरने वालों और मशअरुल हराम में ठहरने वालों को क्षमा कर देते हैं।
(६) उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के प्रश्न के उत्तर में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि अरफ़ात आने वालों के लिए यह क्षमा क़ियामत तक जारी रहेगी।
(७) धरती वालों को लेकर अल्लाह फ़रिश्तों के समक्ष गर्व करते हुए कहते हैं, ‘‘मेरे बन्दों की ओर देखो, वे धूल-धूसरित अवस्था में बिखरे बालों के साथ दूर-दूर से मेरी रहमत की आशा में आए हैं, जबकि उन्होंने मेरा अज़ाब नहीं देखा है। अतः अरफ़ा के दिन मैं इतनी बड़ी संख्या में लोगों को जहन्नम से मुक्ति दे रहा हूँ, जितनी मुक्ति उन्हें किसी अन्य दिन नहीं मिली।
(८) उस दिन शैतान सबसे अधिक अपमानित, तुच्छ और निकृष्ट हो जाता है तथा क्रोधित दिखाई देता है। बन्दों की दुआ क़बूल करके और ज़िक्र के माध्यम से शैतान को दुःखी कर दिया जाता है।
(९) उस दिन अल्लाह कहते हैं, ये क्या चाहते हैं? अर्थात हाजी जो कुछ चाहते हैं, वह उन्हें दे देते हैं।
(१०) उस दिन फ़रिश्ते उतरते हैं और रहमत बरसती है।