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सवाल-जवाब

हज

जिन दुआ की किताबों में क़ुरआन और हदीस की दुआएँ हैं, क्या महिलाएँ मासिक धर्म की अवस्था में अरफ़ात के मैदान में उन दुआओं को पढ़ सकती हैं?

हाँ, पढ़ सकती है। क्योंकि संभोग या स्वप्नदोष के कारण जो नापाकी होती है, उससे व्यक्ति चाहे तो तुरंत ग़ुस्ल करके पाक हो सकता है। लेकिन हैज़-निफ़ास से पाक होना मनुष्य की इच्छा पर निर्भर नहीं है। यह मामला अल्लाह के हाथ में है और इसमें समय लगता है। इसलिए हैज़-निफ़ास वाली महिलाओं के लिए क़ुरआन-हदीस की ये दुआएँ पढ़ना जायज़ है।