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उमराह गाइड

उमराह अदा करने में होने वाली सामान्य गलतियाँ

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इहराम में हाजियों की सामान्य गलतियाँ

5 मिनट में पढ़ेंआखिरी अपडेट 29 अगस्त 2026

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ि.) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्ल.) ने मीक़ात निर्धारित किए: मदीना वालों के लिए ‘ज़ुलहुलैफ़ा’ नामक स्थान को, जिसका वर्तमान नाम अबयार अली है; शाम देश के निवासियों के लिए ‘जुहफ़ा’ नामक स्थान को; नज्द वालों के लिए ‘क़रनुल मनाज़िल’ नामक स्थान को, जिसका वर्तमान नाम अस-सैलुल कबीर है; और यमन वालों के लिए ‘यलमलम’ नामक स्थान को। और आपने यह भी कहा: ये मीक़ात इन क्षेत्रों के निवासियों के लिए और उन सभी लोगों के लिए हैं जो दूसरे क्षेत्रों से इस मार्ग से आएँ, यदि वे हज्ज या उमरा की नीयत से आएँ।[1]

आयिशा (रज़ि.) से यह भी वर्णित है, वह कहती हैं कि नबी (सल्ल.) ने इराक़ वालों के लिए ‘ज़ातु इर्क़’ नामक स्थान को मीक़ात निर्धारित किया।[2]

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) से यह भी वर्णित है कि नबी (सल्ल.) ने कहा:

يُهِلُّ أَهْلُ الْمَدِينَةِ مِنْ ذِي الْحُلَيْفَةِ وَيُهِلُّ أَهْلُ الشَّأْمِ مِنْ الْجُحْفَةِ وَيُهِلُّ أَهْلُ نَجْدٍ مِنْ قَرْن

मदीना वाले ज़ुलहुलैफ़ा से इहराम बाँधेंगे, शाम वाले जुहफ़ा से इहराम बाँधेंगे और नज्द वाले क़र्न से इहराम बाँधेंगे।[3]

इन मीक़ातों को अल्लाह के रसूल (सल्ल.) ने स्वयं निर्धारित किया है और यह अल्लाह की ओर से दी गई शरीअत है। अतः किसी के लिए इन्हें बदलना, इनमें ज़्यादती करना अथवा हज्ज या उमरा करने के इच्छुक लोगों के लिए बिना इहराम के इन्हें पार करना जायज़ नहीं है। क्योंकि यह महान अल्लाह की निर्धारित सीमाओं (नियमों) का उल्लंघन करने के समान है। और अल्लाह तआला ने कहा है:

وَمَن يَتَعَدَّ حُدُودَ اللّهِ فَأُوْلَـئِكَ هُمُ الظَّالِمُونَ

और जो लोग अल्लाह की निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन करेंगे, वही ज़ालिम हैं।[4]

और नबी (सल्ल.) से वर्णित अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) की हदीस में है कि:

يُهِلُّ أَهْلُ المَدِينَةِ مِنْ ذِي الحُلَيْفَةِ، وَيُهِلُّ أَهْلُ الشَّأْمِ مِنَ الجُحْفَةِ، وَأَهْلُ نَجْدٍ مِنْ قَرْنٍ

मदीना वाले ज़ुलहुलैफ़ा से इहराम बाँधेंगे, शाम वाले जुहफ़ा से इहराम बाँधेंगे और नज्द वाले क़र्न से इहराम बाँधेंगे।[5]

इस हदीस का अर्थ आदेशसूचक है। इसी कारण इब्न उमर (रज़ि.) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्ल.) ने मीक़ातों को फ़र्ज़ अर्थात निर्धारित किया है, जैसा कि पहले उल्लेख किया जा चुका है।

अतः हज्ज या उमरा करने का इच्छुक व्यक्ति उपर्युक्त मीक़ातों से या उनके समानांतर होकर गुज़रे तो उसके लिए वहीं से इहराम बाँधना वाजिब है, चाहे वह स्थल मार्ग से आए, समुद्री मार्ग से या हवाई मार्ग से।

इसलिए यदि कोई व्यक्ति स्थल मार्ग से आकर उस मीक़ात से गुज़रे तो वह वहाँ उतरेगा। और यदि वह उससे दूर उसके समानांतर होकर गुज़रे तो मीक़ात के समानांतर पहुँचने पर इहराम के समय किए जाने वाले कार्य करेगा; जैसे स्नान करना, शरीर पर सुगंध लगाना और पुरुषों के लिए बिना सिले इहराम के कपड़े पहनना। इसके बाद मीक़ात से प्रस्थान करने से पहले ही इहराम की नीयत करेगा।

और यदि कोई व्यक्ति जल मार्ग से हज्ज या उमरा के उद्देश्य से आए और जहाज़ मीक़ात के समानांतर रुकता हो, तो वह वहाँ स्नान करेगा, सुगंध लगाएगा और ठहरे हुए ही पुरुष बिना सिले इहराम के कपड़े पहनेंगे। इसके बाद वहाँ से प्रस्थान करने से पहले ही इहराम की नीयत करेगा। लेकिन यदि जहाज़ मीक़ात के समानांतर न रुके तो मीक़ात के समानांतर पहुँचने से पहले ही स्नान करेगा, सुगंध लगाएगा और उसी अवस्था में पुरुष बिना सिले इहराम के कपड़े पहनेंगे। इसके बाद मीक़ात के समानांतर पहुँचने से पहले ही इहराम की नीयत करेगा।

और यदि कोई व्यक्ति हज्ज या उमरा के उद्देश्य से हवाई मार्ग से आए तो विमान में चढ़ने से पहले ही स्नान कर लेगा, सुगंध लगाएगा और पुरुष बिना सिले इहराम के कपड़े पहनेंगे। इसके बाद मीक़ात के समानांतर पहुँचने की प्रतीक्षा किए बिना उससे कुछ पहले ही इहराम की नीयत करेगा। क्योंकि विमान बहुत तेज़ी से मार्ग पार करता है, इसलिए मीक़ात के समानांतर पहुँचने का समय नहीं मिलेगा। अतः यदि वह मीक़ात के समानांतर पहुँचने से काफी पहले ही इहराम बाँध ले तो इसमें कोई दोष नहीं है।

यहाँ कुछ लोग जो भूल करते हैं, वह यह है कि वे विमान में बैठकर मीक़ात के ऊपर से या उसके आसपास से गुज़र जाते हैं, फिर जिद्दा हवाई अड्डे पर उतरते हैं और वहाँ से इहराम बाँधते हैं। जबकि यह नबी (सल्ल.) के निर्देश के विरुद्ध कार्य और अल्लाह की निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन है।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) से वर्णित है, वह कहते हैं कि जब बसरा और कूफ़ा दोनों नगरों पर विजय प्राप्त हुई तो लोग उमर (रज़ि.) के पास आए और कहा कि नबी (सल्ल.) ने नज्द वालों के लिए क़र्न नामक स्थान को मीक़ात निर्धारित किया है, जो हमारे मार्ग की विपरीत दिशा में है। इसलिए यदि हम क़र्न नामक स्थान पर आकर इहराम बाँधें तो यह हमारे लिए बहुत कठिन हो जाता है। तब ख़लीफ़ा उमर (रज़ि.) ने कहा: फिर तुम अपने मार्ग में ‘क़रनुल मनाज़िल’ के समानांतर स्थान ढूँढ़ लो। इस प्रकार जो लोग मीक़ात से होकर नहीं गुज़र सकते थे, अमीरुल मोमिनीन, ख़लीफ़ा-ए-राशिदीन ने उनके लिए मीक़ात के समानांतर स्थान को ही मीक़ात माना।[6] और जिस प्रकार स्थल पर मीक़ात के समानांतर होना है, उसी प्रकार हवाई मार्ग में भी मीक़ात के समानांतर होना है। दोनों के बीच कोई अंतर नहीं है।

अतः यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की भूल कर बैठे, जैसे इहराम बाँधने से पहले जिद्दा में उतर जाए, तो वह हवाई मार्ग में जिस मीक़ात के समानांतर होकर गुज़रा था, उस मीक़ात पर वापस जाकर वहीं से इहराम बाँधेगा। और यदि वह ऐसा न करे और जिद्दा से इहराम बाँधे तो अधिकांश आलिमों के मतानुसार उसे मक्का में फ़िदया अर्थात क़ुरबानी ज़बह करके उसका सारा मांस वहाँ के निर्धनों में बाँटना होगा। वह व्यक्ति उसमें से कुछ भी नहीं खा सकेगा और न ही किसी संपन्न व्यक्ति को उसमें से उपहार दे सकेगा। क्योंकि यह कफ़्फ़ारे के समान है।

[1]. सहीह बुख़ारी 1524।

[2]. सुनन अबू दाऊद 1739 और सुनन नसाई 2653।

[3]. सहीह बुख़ारी 1526 और मुस्लिम 1181।

[4]. सूरा अल-बक़रा 2: 229

[5]. सहीह बुख़ारी 1525।

[6]. सहीह बुख़ारी 1531।

क़ुरआन और हदीस के प्रकाश में हज्ज, उमरा और मदीना की ज़ियारत - शैख़ मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन (रह.)