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मिना में ठहरना

1 मिनट में पढ़ेंआखिरी अपडेट 11 सितंबर 2026

इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने मिना में ठहराव किया था। इसके अतिरिक्त, विभिन्न रिवायतों से पता चलता है कि सत्तर नबी और रसूल अलैहिमुस्सलाम ने मिना स्थित मस्जिदे ख़ैफ़ में सलात अदा की है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया,

«لَقَدْ سَلَكَ فَجَّ الرَّوْحَاءِ سَبْعُونَ نَبِيًّا حُجَّاجًا عَلَيْهِمْ ثِيَابُ الصُّوفِ وَلَقَدْ صَلَّى فِى مَسْجِدِ الْخَيْفِ سَبْعُونَ نَبِيًّا».

‘फ़ज्जे-रौहा से होकर सत्तर नबी ऊनी वस्त्र पहनकर हज करने गए थे और सत्तर नबियों ने मस्जिदे ख़ैफ़ में सलात अदा की थी।’[1]

एक अन्य हदीस में आया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया,

«صلى في مسجد الخيف سبعون نبيا منهم موسى كأني أنظر اليه وعليه عباءتان قطوانيتان وهو محرم على بعير من ابل شنؤة مخطوم بخطام ليف له ضفران».

‘मस्जिदे ख़ैफ़ में सत्तर नबियों ने सलात अदा की है, मूसा अलैहिस्सलाम उनमें से एक हैं। मानो मैं उनकी ओर देख रहा हूँ। उनके शरीर पर दो क़ुतवानी चादरें लिपटी हुई हैं। वह दो गुच्छों वाली लगाम से युक्त ऊँट पर इहराम बाँधकर बैठे हुए हैं।’[2]

[1]. मुस्तदरक हाकिम : 2/653।

[2]. मु‘जमुल कबीर : 11/452।