वे स्वच्छ होंगी, ग़ुस्ल करेंगी और इहराम पहनेंगी। लेकिन हैज़-निफ़ास की अवस्था में नमाज़ नहीं पढ़ेंगी और काबा का तवाफ़ नहीं करेंगी। बाक़ी सभी कार्य करेंगी। फिर जब पाक हो जाएँगी, तब वुज़ू और ग़ुस्ल करके तवाफ़ तथा सई करेंगी। यदि इहराम के बाद हैज़ शुरू हो जाए, तब भी पाक होने तक काबा का तवाफ़ नहीं करेंगी।
सवाल-जवाब
इहराम