दुआएं
क्षमा और तौबा
2 दुआएं
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क्षमायाचना और तौबा करना
«أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الْعَظيمَ الَّذِي لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ القَيّوُمُ وَأَتُوبُ إِلَيهِ»
‘मैं परम महान अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ, जिनके सिवा कोई सत्य उपास्य नहीं है। वह चिरस्थायी और समस्त सृष्टि के धारक हैं। और मैं उन्हीं के समक्ष तौबा करता हूँ।’
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सय्यिदुल इस्तिग़फ़ार
للَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لاَ يَغْفِرُ الذُّنوبَ إِلاَّ أَنْتَ
ऐ अल्लाह! आप मेरे रब हैं, आपके सिवा कोई सच्चा इलाह नहीं है। आपने मुझे पैदा किया है और मैं आपका बंदा हूँ। और मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार आपसे की गई (तौहीद की) प्रतिज्ञा और आपके (जन्नत के) वादे पर कायम हूँ। मैं अपने किए हुए कर्मों की बुराई से आपकी पनाह चाहता हूँ। आपने मुझे जो नेमतें दी हैं, मैं उन्हें स्वीकार करता हूँ और मैं अपने गुनाहों को भी स्वीकार करता हूँ। अतः आप मुझे माफ़ कर दें। निश्चय ही आपके सिवा कोई भी गुनाहों को माफ़ नहीं करता।
संदर्भ: Hisnul Muslim