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हज गाइड

हज अदा करने के पवित्र स्थानों का परिचय

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मुल्तज़म

1 मिनट में पढ़ेंआखिरी अपडेट 1 सितंबर 2026

हजरे असवद से काबा शरीफ़ के दरवाज़े तक की जगह को मुल्तज़म कहा जाता है।[1] मुल्तज़म शब्द का शाब्दिक अर्थ है ‘चिपके रहने की जगह’। सहाबा-ए-किराम मक्का आकर मुल्तज़म पर जाते और दोनों हथेलियाँ, दोनों हाथ, चेहरा और सीना लगाकर दुआ करते थे। विदाई तवाफ़ से पहले या बाद में अथवा किसी भी अन्य समय मुल्तज़म पर जाकर दुआ की जा सकती है। इमाम इब्ने तैमिय्याह (रह.) कहते हैं—

إن أحب أن يأتي الملتزم وهو ما بين الحجر الأسود والباب فيضع عليه صدره ووجهه وذراعيه وكفيه ويدعو، ويسأل الله تعالى حاجته، فعل ذلك وله أن يفعل قبل طواف الوداع ، فإن هذا الالتزام لا فرق بين أن يكون حال الوداع وغيره ، والصحابة كانوا يفعلون ذلك حين يدخلون مكة

—यदि वह मुल्तज़म पर आने का इरादा करे—मुल्तज़म हजरे असवद और दरवाज़े के बीच का स्थान है—फिर वहाँ अपना सीना, चेहरा, दोनों बाज़ू और दोनों हाथ रखे, दुआ करे और अल्लाह से अपनी ज़रूरतें माँगे, तो ऐसा करने की अनुमति है। विदाई तवाफ़ से पहले भी ऐसा कर सकता है। मुल्तज़म को पकड़ने के मामले में विदाई की अवस्था और अन्य अवस्थाओं के बीच कोई अंतर नहीं है। सहाबा जब मक्का में प्रवेश करते थे, तो ऐसा ही करते थे।[2] लेकिन वर्तमान युग में लाखों लोगों की भीड़ में मुल्तज़म पर वापस जाना अत्यंत कठिन है। इसलिए अवसर मिले तो जाएँ, अन्यथा जाने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि मुल्तज़म पर जाना तवाफ़ का हिस्सा नहीं है।

[1] - अल-मुसन्नफ़ लि-अब्दिर रज़्ज़ाक : ५/७३

[2] - शैख़ुल इस्लाम इब्ने तैमिय्याह की मजमूउल फ़तावा : २६/१४२