हाजियों में आम तौर पर जो त्रुटियाँ और विचलन देखने को मिलते हैं, वे निम्नलिखित हैंः
(१) कुछ लोग अरफ़ात की सीमा के बाहर बैठे रहते हैं, जबकि अरफ़ात की सीमा को चिह्नित करने वाले खंभे चारों ओर लगे हुए हैं। ऐसा करने से हज्ज अमान्य हो जाएगा।
(२) कुछ हाजी पहाड़ पर जाकर भीड़ लगाते हैं, उसके पत्थरों को छूकर अपने शरीर पर मलते हैं। ये कार्य शिर्क और बिदअत के अंतर्गत आते हैं।
(३) कुछ हाजी निरर्थक बातचीत, गपशप और हँसी-मज़ाक में लगकर दुआ-कलाम पढ़ने से विरत रहते हैं और बहुमूल्य समय नष्ट करके हज्ज को क्षति पहुँचाते हैं।
(४) फिर कुछ लोग दुआ के समय क़िबला की ओर मुख करने के बजाय जबले रहमत पहाड़ की ओर मुख करके दुआ करते हैं, जबकि सुन्नत काबा की ओर मुख करके दुआ करना है।
(५) एक और बड़ी गलती यह है कि कुछ हाजी सूर्यास्त से पहले ही अरफ़ात का मैदान छोड़कर चले जाते हैं। यह जायज़ नहीं है।
(६) कुछ हाजी फ़ज्र से पहले ही मिना से अरफ़ात के लिए रवाना हो जाते हैं। सुन्नत यह है कि सूर्योदय के बाद रवाना हुआ जाए।
(७) मस्जिदे नमिरा में जमाअत न मिलने पर ज़ुहर और अस्र को एक साथ न पढ़कर अलग-अलग वक़्त में अदा करते हैं। यह भी सही नहीं है।
(८) अरफ़ात में ज़ुहर और अस्र को एक साथ पढ़ना तथा दोनों को दो-दो रकअत क़स्र करना जायज़ न समझना। यह गलत धारणा है।