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सवाल-जवाब

हज

“मशअरुल हराम” क्या है? यह कहाँ है? यहाँ हाजियों के लिए कौन-कौन से कार्य सुन्नत हैं?

‘‘मशअरुल हराम’’ एक पहाड़ का नाम है। यह मुज़दलिफ़ा में स्थित है। यहाँ एक मस्जिद भी है। यहाँ हाजियों के लिए निम्नलिखित कार्य करने हैंः

(१) मशअरुल हराम के निकट क़िबला की ओर मुँह करके खड़े होना,

(२) तकबीर कहना,

(३) तस्बीह-तहलील पढ़ना अर्थात् ‘सुब्हानल्लाह’, ‘अल्हम्दु लिल्लाह’ और ‘ला इलाहा इल्लल्लाहु’ पढ़ना।

(४) ज़िक्र करना और

(५) दिल खोलकर अल्लाह तआला से दुआ करना,

(६) ख़ुशू-ख़ुज़ू और विनम्रता के साथ माबूद से जो कुछ माँगना हो, माँग लें। विशेष रूप से अपने माता-पिता, पत्नी, पुत्र-संतान और अपने प्रियजनों व रिश्तेदारों के लिए भी दुआ करें।

(७) दुआ के समय दोनों हाथ उठाकर मुनाजात करना मुस्तहब है।

इस प्रकार फ़ज्र की नमाज़ के बाद से आकाश उजला होने तक दुआ करते रहना मुस्तहब है। भीड़ के कारण ‘‘मशअरुल हराम’’ के निकट न जा सकें तो मुज़दलिफ़ा में किसी भी स्थान पर खड़े होकर इसी प्रकार दुआ करें।