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सवाल-जवाब

हज

मुज़दलिफ़ा में मग़रिब और इशा कब पढ़ें और कैसे पढ़ें?

(१) देर हो जाए, तब भी मुज़दलिफ़ा पहुँचकर मग़रिब और इशा पढ़नी होंगी, इससे पहले नहीं। लेकिन इन दोनों नमाज़ों को विलंब करते-करते आधी रात के बाद तक ले जाना जायज़ नहीं होगा। हाँ, कोई उज़्र हो तो जायज़ है।

(२) तरतीब का ध्यान रखते हुए नमाज़ अदा करें। अर्थात पहले मग़रिब की तीन रकअत फ़र्ज़ और उसके तुरंत बाद इशा की दो रकअत फ़र्ज़ अदा करें, वित्र पढ़ें और फ़ज्र की सुन्नत भी न छोड़ें।

(३) इन दोनों वक़्त की नमाज़ों के लिए केवल एक बार अज़ान दें। लेकिन इक़ामत दोनों बार देनी होगी।

(४) नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुज़दलिफ़ा में कोई नफ़्ल या सुन्नत नमाज़ नहीं पढ़ी। आप भी न पढ़ें।

(५) नमाज़ अदा करते ही सो जाएँ, ताकि अगले दिन के कार्य सक्रियतापूर्वक पूरे किए जा सकें।

(६) उस दिन फ़ज्र की नमाज़ अँधेरा रहते ही अव्वल वक़्त में पढ़ लें। दो रकअत फ़र्ज़ के साथ दो रकअत सुन्नत भी पढ़ें। इसके बाद ‘मशअरुल हराम’ के निकट क़िबला-रुख़ खड़े होकर हाथ उठाकर दुआ-मुनाजात करते रहें। यहाँ न आ सकें तो कोई परेशानी नहीं। मुज़दलिफ़ा में किसी भी स्थान पर खड़े होकर दुआ कर सकते हैं।