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मक्का में प्रवेश

2 मिनट में पढ़ेंआखिरी अपडेट 9 सितंबर 2026

पवित्र मक्का में प्रवेश करते समय प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अल्लाह की श्रेष्ठता और महानता को याद करे। हृदय को कोमल बनाए। यह स्मरण करे कि अल्लाह के निकट पवित्र मक्का कितना सम्मानित और प्रतिष्ठित है। पवित्र मक्का में रहने के दौरान उसकी उचित मर्यादा बनाए रखने का प्रयास करे। हज और उमरा करने वाले व्यक्ति के लिए पवित्र मक्का में प्रवेश करने के बाद निम्न प्रकार से अमल करना मुस्तहब है।

१. किसी उपयुक्त स्थान पर विश्राम करना, ताकि तवाफ से पहले यात्रा की थकान दूर हो जाए और शरीर में स्फूर्ति लौट आए। यदि विश्राम न कर सकें तो भी कोई समस्या नहीं है। इब्न उमर रज़ि. से वर्णित है, उन्होंने कहा,

«بَاتَ رسول الله صلى الله عليه وسلم بِذِي طُوًى حَتَّى أَصْبَحَ ثُمَّ دَخَلَ مَكَّةَ»

‘नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (हज की यात्रा में) ज़ी-तुवा पहुँचे और वहाँ रात बिताई। सुबह होने के बाद उन्होंने मक्का में प्रवेश किया।’[1] इब्न उमर रज़ि. मक्का आने पर ज़ी-तुवा में रात बिताते थे। भोर होने पर स्नान करते थे। वह कहते थे कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी ऐसा ही करते थे।[2] वर्तमान समय में मक्का में हाजियों के निवास-स्थान पर जाकर स्नान कर लेने से भी यह सुन्नत अदा हो जाएगी।

२. मुहरिम के लिए किसी भी दिशा से मक्का में प्रवेश करने की गुंजाइश है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया,

«وَكُلُّ فِجَاجِ مَكَّةَ طَرِيقٌ».

‘मक्का की प्रत्येक गली ही मार्ग (प्रवेश-स्थान) है।’[3]

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बथा के मुअल्ला की ओर से, जो वर्तमान में हजून नामक ऊँचे स्थान पर स्थित ‘कदा’ नामक मार्ग से मक्का में प्रवेश करते थे और निचले स्थान अर्थात ‘कुदै’ नामक मार्ग से बाहर निकलते थे।[4] अतः नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अनुसरण करते हुए यदि किसी के लिए उसी प्रकार मक्का में प्रवेश करना और वहाँ से निकलना संभव हो, तो यह उत्तम होगा।

लेकिन वर्तमान युग में आपको मोटर वाहन से मक्का ले जाया जाएगा। आपको अपने निवास-स्थान तक पहुँचने के लिए सुविधाजनक मार्ग से ही जाना होगा। इसलिए रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जिस दिशा से मक्का में प्रवेश किया था, उस दिशा से प्रवेश करना आपके लिए संभव नहीं भी हो सकता है। इसमें कोई कठिनाई नहीं है। आपका वाहन सुविधानुसार जिस मार्ग से जाएगा, आप उसी मार्ग से जाएँगे। अपने निवास-स्थान पर सामान रखकर और विश्राम करके उमरा की तैयारी करेंगे।

मुहरिम किसी भी समय मक्का में प्रवेश कर सकता है। लेकिन दिन के पहले पहर में प्रवेश करना उत्तम है। इब्न उमर रज़ि. से वर्णित है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ‘ज़ी-तुवा में रात बिताई। सुबह होने पर उन्होंने मक्का में प्रवेश किया।’[5]

[1]. बुखारी : १५७४; मुस्लिम : १२५९। (वर्तमान में जरवल क्षेत्र में स्थित प्रसूति अस्पताल के स्थान का नाम ज़ी-तुवा था।)

[2]. बुखारी : ३/४३६; मुस्लिम : २/९१९।

[3]. अबू दाऊद : १९३७।

[4]. बुखारी : १५७६।

[5]. पूर्वोक्त।