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हज और उमरा करने वाले सई में जो गलतियाँ करते हैं

2 मिनट में पढ़ेंआखिरी अपडेट 9 सितंबर 2026

१. कुछ लोग समझते हैं कि सई सफा से शुरू होकर मरवा से वापस सफा आने पर ही एक चक्कर पूरा होता है। यह स्पष्ट रूप से गलत है। सही यह है कि सफा से मरवा तक जाना एक चक्कर है और मरवा से लौटकर फिर सफा आने पर दो चक्कर पूरे होते हैं।

२. सफा पहाड़ी पर चढ़कर दोनों हाथ उठाना और सलात की तकबीर की तरह काबा की ओर दोनों हाथ उठाकर इशारा करना।

३. सफा और मरवा पर हर बार चढ़ते-उतरते समय إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِنْ شَعَائِرِ اللَّهِ [1] इस आयत की तिलावत करना। क्योंकि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह आयत केवल पहली बार सफा पर चढ़ते समय ही पढ़ी थी।

४. सई के प्रत्येक चक्कर के लिए कोई विशेष दुआ निर्धारित करना। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इस प्रकार की कोई हदीस वर्णित नहीं है। इसलिए बेहतर यह है कि कोई निर्धारित चीज़ न पढ़कर क़ुरआन-हदीस में वर्णित कोई भी दुआ की जाए या अपनी भाषा में दुनिया और आख़िरत की भलाई के लिए जो मन चाहे, वही माँगा जाए। यही अधिक क़बूल होने योग्य और सुन्नत के अनुरूप अमल है।

५. सई में इज़्तिबा करना। सही यह है कि तवाफ़े-क़ुदूम के अलावा कहीं और इज़्तिबा का हुक्म नहीं है। जैसा कि पहले कहा जा चुका है।

६. सई पूरी करने के लिए सफा और मरवा की चोटी पर चढ़ने को शर्त समझना। जबकि यह शर्त नहीं है। सफा और मरवा दोनों पहाड़ियों के बीच कमज़ोर लोगों की व्हीलचेयर घुमाने के लिए जो स्थान है, वहाँ आना-जाना ही पर्याप्त है।

७. तवाफ़ की तरह सई के लिए भी पवित्रता और उज़ू को शर्त समझना। सई के लिए पवित्रता और उज़ू शर्त नहीं हैं, हालाँकि ऐसा करना बेहतर है।

८. यह धारणा रखना कि आवश्यकता होने पर भी सई की निरंतरता को भंग नहीं किया जा सकता। जैसे: थकान दूर करने के लिए आराम करना, पानी पीना, मल-मूत्र त्याग करना अथवा सलात या जनाज़े की सलात में भाग लेना आदि आवश्यकताओं के लिए विराम नहीं लिया जा सकता। यह सही नहीं है; वास्तव में ये काम करने में कोई दोष नहीं है।

९. यह समझना कि तवाफ़ के तुरंत बाद सई न की जाए तो वह सही नहीं होगी। सई तवाफ़ के बाद ही करनी होगी; लेकिन उसे तुरंत करना आवश्यक नहीं है। हालाँकि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अनुसरण करते हुए तवाफ़ के बाद यथासंभव विलंब किए बिना सई करना ही बेहतर है।

१०. नफ़्ल तवाफ़ की तरह नफ़्ल सई करना। क्योंकि सई केवल हज से संबंधित एक विशेष इबादत है। नफ़्ल के रूप में स्वतंत्र रूप से सई करने का कोई विधान नहीं है। इसलिए नफ़्ल सई में कोई सवाब भी नहीं है।

[1]. बक़रा : १५८।