तलबिया पढ़ते-पढ़ते पवित्र काबा की ओर रवाना हों। किसी भी द्वार से दायाँ पैर रखकर, विनम्रता और नम्रता के साथ अल्लाह की महानता को याद करते हुए तथा हज के उद्देश्य से बैतुल्लाह तक सुरक्षित पहुँचने की तौफ़ीक़ प्रदान करने पर अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए मस्जिदुल हराम में प्रवेश करें। प्रवेश करते समय, अल्लाह से अपनी रहमत के सभी द्वार खोल देने की विनती करते हुए, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दुरूद व सलाम भेजने वाली निम्नलिखित दुआ पढ़ें :[1]
«أَعُوذُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ وَبِوَجْهِهِ الْكَرِيمِ وَسُلْطَانِهِ الْقَدِيمِ مِنْ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ بِسْمِ اللهِ وَالصَّلَاةُ وَالسَّلَامُ عَلى رَسُوْلِ اللهِ، اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِيْ ذُنُوْبِيْ، وَافْتَحْ لِيْ أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ».
(आऊज़ु बिल्लाहिल अज़ीमि व वज्हिहिल करीमि व सुल्तानिहिल क़दीमि मिनश्शैतानिर रजीम। बिस्मिल्लाहि वस्सलातु वस्सलामु अला रसूलिल्लाह, अल्लाहुम्मग़फ़िर ली ज़ुनूबी वफ़्तह ली अबवाबा रहमतिक।)
‘मैं महान अल्लाह, उनके सम्मानित मुख और उनके चिरस्थायी प्रभुत्व के माध्यम से धिक्कारे हुए शैतान से पनाह माँगता हूँ। अल्लाह के नाम से आरंभ करता हूँ। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर सलात व सलाम हो। ऐ अल्लाह! मेरे गुनाहों को माफ़ कर दीजिए और मेरे लिए अपनी रहमत के सभी द्वार खोल दीजिए।’
[1]. अन्य दुआओं के साथ यह दुआ विभिन्न हदीसों में वर्णित हुई है। और दुरूद पढ़ने की बात भी आई है। हाकिम : 1/325; अबू दाऊद : 465।